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सामान्य बोल चाल की भाषा में शराब, गांजा, स्मैक, टेबलेट या अफीम आदि को नशा कहा जाता है किंतु चिकित्सकीय भाषा में ये सभी ड्रग्स है और इन सबका औषधीय उपयोग है जैसे अल्कोहोल, गांजा और अफीम का उपयोग दवा बनाने वाली कंपनियों द्वारा दवा बनाने में किया जाता है और लोगों द्वारा बहुत सी दवाएं जैसे नेटराबेट 10, विलियम 10, मार्फिन आदि का उपयोग नशे में किया जाता है। ये सब दवाएं है तो नशा क्या है ? चिकित्सा शास्त्र के अनुसार नशा अर्थात एडिक्शन ये एक बीमारी है ये जिसको हो जाती है वह किसी पदार्थ का अनियंत्रित उपयोग करने लगता है या कोई कार्य/ व्यवहार बार बार करने लगता है इसके कारण उसका जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है। एडिक्शन को मुख्यतः दो भागों में बांटा जाता है:-
1. सब्स्टेन्स एडिक्शन या पदार्थ का नशा ;
2. बिहेवियरल एडिक्शन या व्यवहार का नशा।
पदार्थ के नशे में शराब, गांजा, चरस, अफीम या अन्य भौतिक पदार्थ का अनियंत्रित उपयोग होता है और वह शारीरिक और मानसिक रूप से पदार्थों पर निर्भर हो जाता है और जब बंद करना चाहता है तो उसे शारीरिक और मानसिक कष्ट होता है जिस कारण वो चाह कर भी इन्हें बंद नही कर पाता है। बेहविओरल या व्यवहार के नशे में जुआ, सोशल मीडिया, सेक्स, वीडियो गेम जैसे पब्जी आदि आते है इनकी मानसिक निर्भरता होती है व्यक्ति को केवल यह करने पर ही अच्छा लगता है और वो चाह कर भी इनको बंद नहीं कर पाता है चाहे इस कारण उनका कितना भी नुकसान हो रहा हो। आपने कई जुआरियों को देखा होगा अपना सब जुए में बर्बाद कर लेते है फिर भी बंद नहीं कर पाते है। आज निम्हान्स में एक सोशल मीडिया एडिक्शन वार्ड अलग से खुल गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सोशल मीडिया के एडिक्शन को बीमारी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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